है ये सच,
फिर भी क्यूं ना होता मुझे यकीन है,
जिनके साये में मैं थी नादान
जिनके नाम से है मेरी पहचान,
जिनकी आंखों में पलते थे मेरे अरमान
जिनके दर्द में मैं नहीं थी उनके पास,
बनाकर मुझे जिम्मेदार
खो गए वो ना जाने कहां।
अमृता प्रीतम द्वारा लिखित “कोरे कागज” उपन्यास व्यक्ति के अंतर्गत की उथल-पुथल एवं स्वयं के होने की सच्चाई जानने की इच्छा पर आधारित है | उ...