बुधवार, 24 मई 2023

खो गए...

वो पास होकर भी मुझसे दूर है,
है ये सच,
फिर भी क्यूं ना होता मुझे यकीन है,
जिनके साये में मैं थी नादान
जिनके नाम से है मेरी पहचान,
जिनकी आंखों में पलते थे मेरे अरमान
जिनके दर्द में मैं नहीं थी उनके पास,
बनाकर मुझे जिम्मेदार
खो गए वो ना जाने कहां।

पुस्तक समीक्षा - कोरे कागज

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