बुधवार, 27 मार्च 2024

समय की चाल

कुछ ख्वाबों को पाना है,
मेरी मंजिल तक जाना है,
बहुत लंबे है रास्ते पर
हर हाल में चलते जाना है।

मुश्किल नहीं है राहें यकीनन
मेरा साहस डगमगाता है,
बीच राह में रुक रुककर
ना पाने का डर सताता है।


पुस्तक समीक्षा - कोरे कागज

  अमृता प्रीतम द्वारा लिखित “कोरे कागज” उपन्यास व्यक्ति के अंतर्गत की उथल-पुथल एवं स्वयं के होने की सच्चाई जानने की इच्छा पर आधारित है | उ...