खुद को मारना, खत्म करना।
वैसे तो जिंदगी में बहुत से रंग है और हर रंग अपने साथ अनगिनत खुशियां समेटे हुए रहता है। पर हर व्यक्ति को अपने अजीज-परिवार-प्यार के साथ ही जिंदगी हसीन लगती है और जब इनमें से कोई धोखा दे देता है तो जीवन खत्म सा लगता है।
आज की दुनिया में सबसे अच्छी और सच्ची खुशी खुद के खुश रहने में है और यही सबसे मुश्किल काम भी है। किसी के पीछे भागने से अच्छा है कि खुद को खोजा जाए। अपनी खुशी को किसी दूसरे के हाथों में ना सौंपा जाए। किसी पहचान या शौहरत के पीछे भागने की जगह अपनी आत्मा को महसूस करने का प्रयास किया जाए।
इसी कारण आज फिर एक शख्सियत (सुशांत सिंह राजपूत) खुद से हार गया और सो गया हमेशा के लिए। पर क्या ये हार परिवार, दोस्त और उसके चाहने वालों के प्यार से भी लड़ नहीं पाई? क्यों वो उस आखिरी हार के लम्हे में अपनों से बात तक नहीं कर पाया। मानती हूँ कि उस क्षण का सामना करना और उससे जितना ही जिंदगी का असली इम्तिहान है पर खुद को हारना हर उस व्यक्ति की हार है जो आपसे मन से जुड़ा हुआ है।
धोनी.... अनटोल्ड स्टोरी में सुशांत की एक्टिंग का लोहा सबने माना और छिछोरे में तो उसने आत्महत्या को बहुत पास से महसूस भी किया फिर कैसे फ़िल्म में अपने बेटे को समझाने वाला खुद ही हार गया। कैसे स्कूल -कॉलेज का सबसे प्रतिभावान व्यक्ति मन से इतना कमजोर हो गया। क्यूँ उसे माता-पिता का चेहरा अंतिम घड़ी नजर नहीं आया। क्यूँ अपसाद उसे अंदर ही अंदर खोखला करने में कामयाब हुआ।
अब मेरे इन प्रश्नों का उत्तर देने के लिए वह नहीं है पर आज आवश्यकता है सर्वप्रथम खुद से प्यार करने की, जीवन को जीने की । किसी के ऊपर निर्भर न रहकर खुद की पहचान बनाने की। अपनी खुशी के लिए अपनी चाहतें अपनी ख्वाइशों को एक लंबी उडान देने की।
हमारा जीवन सिर्फ मेरा ही नहीं है, वो हमारे माता-पिता की भी देन है। हमें कोई हक नहीं है कि हम जिंदगी के तुच्छ किस्सों को अपने जीवन के होने का कारण माने । जीवन सिर्फ एक बार मिलता है इसे अपने लिए जीए।
काश, तुमने एक बार उनसे बात की होती जो तुम्हें पसंद करते है या जो तुम्हें प्यार करते है। मैं दावे के साथ कह सकती हूँ कि अगर तुमने बात की होती तो तुम हमारे साथ होते.....