शनिवार, 23 अप्रैल 2022
बूढ़ा सागरिक (पुस्तक)
मंगलवार, 12 अप्रैल 2022
गंगा माता
है मिसाल भारत की जग में
पूजित यहां जमीं, आसमां और सूरज है,
वृक्ष, गाय और गंगा में भी
देवगणों का ही अंश है।
सजग और सजेत भारत की
फिर जनता क्यूं अनजान है,
जिनकी पवित्रता की कसम लेती
उसका दामन बदबू से बेहाल है।
साम, दाम से अब काम न होगा
दण्ड का रुख अपनाना होगा,
हमारी मां पर फैली गंदगी को
फौरन तट से हटाना होगा।
पावन जल का स्पर्श बहुत है, स्नान बंद कराना होगा
मरणावशेष को गंगा की जगह, कहीं ओर बहाना होगा,
आस-पास के नालों का, रुख कहीं ओर कराना होगा
मंदिर में प्रसाद सामग्री का, चढावा बंद कराना होगा,
नमामि गंगे वाक्य को मन से अपनाना होगा
जनता और प्रशासन को अब मिलकर कदम उठाना होगा।
गंगा माँ
वेदों और पुराणों में
इतिहास के हर दावों में,
हमने सहेजकर रखा है
पाया जो न्यासों में।
पवित्र, पूजित देवी स्वरुप में
गंगा की गाथा जानी है,
भागीरथी बन वो आई
इस धरा में लाई खुशहाली है।
थी विराजमान जो शिव के मस्तक पर
लाने का धरा पर हुआ भागीरथी प्रयास,
कल-कल करती आई धरा पर
किया धरती का पावन हर आधार।
है पावन जल इसका
करता सभी का उद्धार,
जन्म-मृत्यु सभी की है गंगा
हर पल तारणताल।
माता के रुप में पूजित है
पवित्रता की जननी है,
लोगों के तन-मन का पाप दूर करते-करते
खुद ही हो गई मैली है।
गंगा-स्नान के महत्त्व पर
अगर रखना है ध्यान और मान,
सख्ती से प्रशासन करें
गंदगी फैलाने वालों पर मार।
कचरा, नाला, गंदा पानी
का हो अलग निकास,
मृत्यु पूजन की साम्रगी का
हो एक अलग कुण्ड में प्रवाह।
देते है हम सभी गंगा मां को मन से मान
तो क्यूं प्रदूषित कर, करते है उसका अपमान,
नहीं अब कर पाएगा अकेला भागीरथ यह प्रयास
मिलकर कार्य करने पर ही, सफल होगा यह अभियान।
रविवार, 10 अप्रैल 2022
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