शनिवार, 23 अप्रैल 2022

बूढ़ा सागरिक (पुस्तक)

नोबल पुरस्कार विजेता यह पुस्तक एक बूढ़े व्यक्ति और उसके अदम्य साहस की कहानी है। एक बूढ़ा व्यक्ति जो मछुआरा है और उसने 84 दिन से एक भी मछली नहीं पकड़ी है। अगले दिन फिर वह उसी साहस के साथ मछली पकड़ने जाता है।
आत्मविश्वास से वह एक बहुत बड़ी मछली जो लगभग 11 फुट लंबी है, उसे पकड़ने में कामयाब हो जाता है। लेकिन भाग्य उसके विपरित होता है और नाव से बंधी उसकी बड़ी मछली को बारी बारी से शार्क हमला करती है यद्यपि बूढ़ा व्यक्ति सभी शार्क को मार या घायल कर देता है किंतु अपनी बड़ी मछली को बचा नहीं पाता है।
यद्यपि उसकी सारी मेहनत व्यर्थ हो चुकी थी किंतु उसे अपने पर पूर्ण विश्वास है और एक नई सुबह के साथ वह फिर से मछली पकड़ने को तैयार होने का मन बना लेता है।
यकीनन उस बूढ़े व्यक्ति का आत्मविश्वास और साहस उम्र से काफी ज्यादा होता है और यही साहस हमेशा हमें अंत तक हारने नहीं देता। *कोई भी व्यक्ति तब असफल नहीं होता जब वह हार जाता है वह तब असफल होता है जब वह फिर जीतने की कोशिश नहीं करता*।

मंगलवार, 12 अप्रैल 2022

गंगा माता

है मिसाल भारत की जग में 

पूजित यहां जमीं, आसमां और सूरज है,

वृक्ष, गाय और गंगा में भी

देवगणों का ही अंश है।


सजग और सजेत भारत की

फिर जनता क्यूं अनजान है,

जिनकी पवित्रता की कसम लेती

उसका दामन बदबू से बेहाल है।


साम, दाम से अब काम न होगा

दण्ड का रुख अपनाना होगा,

हमारी मां पर फैली गंदगी को

फौरन तट से हटाना होगा।


पावन जल का स्पर्श बहुत है, स्नान बंद कराना होगा

मरणावशेष को गंगा की जगह, कहीं ओर बहाना होगा,

आस-पास के नालों का, रुख कहीं ओर कराना होगा

मंदिर में प्रसाद सामग्री का, चढावा बंद कराना होगा,

नमामि गंगे वाक्य को मन से अपनाना होगा

जनता और प्रशासन को अब मिलकर कदम उठाना होगा।



गंगा माँ

 वेदों और पुराणों में

इतिहास के हर दावों में,

हमने सहेजकर रखा है

पाया जो न्यासों में।


पवित्र, पूजित देवी स्वरुप में

गंगा की गाथा जानी है,

भागीरथी बन वो आई

इस धरा में लाई खुशहाली है।


थी विराजमान जो शिव के मस्तक पर

लाने का धरा पर हुआ भागीरथी प्रयास,

कल-कल करती आई धरा पर

किया धरती का पावन हर आधार।


है पावन जल इसका

करता सभी का उद्धार,

जन्म-मृत्यु सभी की है गंगा

हर पल तारणताल। 


माता के रुप में पूजित है

पवित्रता की जननी है,

लोगों के तन-मन का पाप दूर करते-करते 

खुद ही हो गई मैली है।


गंगा-स्नान के महत्त्व पर

अगर रखना है ध्यान और मान,

सख्ती से प्रशासन करें

गंदगी फैलाने वालों पर मार।


कचरा, नाला, गंदा पानी

का हो अलग निकास,

मृत्यु पूजन की साम्रगी का

हो एक अलग कुण्ड में प्रवाह।


देते है हम सभी गंगा मां को मन से मान 

तो क्यूं प्रदूषित कर, करते है उसका अपमान,

नहीं अब कर पाएगा अकेला भागीरथ यह प्रयास

मिलकर कार्य करने पर ही, सफल होगा यह अभियान।


रविवार, 10 अप्रैल 2022

देह

है पंचतत्व से बना देह,
पल में ही मिट जाता है,
जीवन के आने जाने में,
क्यूं तू अपना मन लगाता है।

है आत्मतत्व बस एक ही,
बाकी बदलता जाता है,
है अमरत्व ही लक्ष्य सभीका,
फिर क्यूं भटकता जाता है।

ये तेरा है ये मेरा है पर,
देह भी ना तेरा है,
जिसके लिए तू लड़ता है,
वो तो मोक्ष प्राप्ति को तरसता है।

मोह माया सब क्षणिक है,
परमतत्व ही मंजिल है,
यूं ना खो इस जीवन को,
ये अमूल्य क्षणों की डोरी है।

दया, करुणा और प्रेम,
मानव से तू कर स्नेह,
सब यही धरा रह जाएगा,
तू वापिस ना आ पाएगा।

जीवन के आने जाने में,
क्यूं तू अपना मन लगाता है।
यह पंचतत्व से बना देह,
पल में ही मिट जाता है।

मंगलवार, 5 अप्रैल 2022

मैनी लाइव्ज मैनी मास्टर्स (पुस्तक)

यह मानव जीवन बहुत ही योनियों को पार करने के बाद हमें मिलता है और जब तक हम धरती पर अपना आना सार्थक नहीं कर पाते तब तक यह आत्मा एक शरीर से दूसरे शरीर में प्रवेश करती रहती है। इसी आत्मतत्व को मोक्ष प्राप्ति और आने जाने के बंधन से मुक्त करने हेतु भारतीय एवम् पाश्चात्य दार्शनिकों ने अपने विचार रखे है।

डॉ ब्रायन वीज ने अपने अनुभव को बांटकर हमें पुर्नजन्म के अनसुलझे पहलू पर सोचने को विवश कर दिया है। शायद यही कारण है जब हम किसी अनजान व्यक्ति से मिलते है और वह हमें बहुत ही जाना पहचाना लगता है।

कैथरीन वह स्त्री है जो अपने अनजान स्वप्नों से अत्यंत विक्षिप्तावस्था तक पहुंच रही थी । वह मनोचिकित्सक से संपर्क करती है और सम्मोहन से उसका इलाज करना तय किया जाता है। उसके बाद पुर्नजन्म की परतें एक के बाद एक खुलनी शुरू हो जाती है और वहीं से उन दुस्वप्नों की डोर जुड़ी हुई होती है।

इस वैज्ञानिक युग में ये पुस्तक जीवन के वास्तविक सत्य का प्रतिनिधित्व करती है जो भारतीय शास्त्रों में पूर्व में बताया जा चुका है। हमारे कर्म ही है जो मृत्यु के पश्चात भी हमारे साथ रहते है और यह शरीर तो नश्वर है।

जीवन का यह सच वर्तमान के हमारे सभी दुखों, परेशानियों और समस्याओं का समाधान है जिसे हम मानना नहीं चाहते है। यह पुस्तक भी इसी भावना के साथ लिखी गई है। 

रविवार, 3 अप्रैल 2022

पिंजर

पूरो....

एक मार्मिक कहानी का अत्यंत संवेदनशील पात्र।
जो परियों के राजकुमार को पाने की अवस्था में पीढ़ियों की दुश्मनी का शिकार हो गई।

धर्म एवम् बदले के नाम पर किए गए अत्याचार में मानव की भावुकता और संवेदनाएं अक्सर कुचल दी जाती है पर रशीद की कथनी और करनी में अंतर नहीं था और उसने पूरो के दिल को कहानी के अंत तक जीत ही लिया था ।

स्त्री पर किया गया अनैतिक कृत्य यकीनन उनके पावन अस्तित्व पर किए गए कुठाराघात का स्मरण करवाता है और कतिपय पुरुष की विक्षिप्त सोच पर प्रश्नचिह्न लगाने पर मजबूर कर देता है।

अमृता प्रीतम जी की कहानी का अंतिम पैरा भारत और लाहौर के मध्य पारो जैसे कई पात्रों के जीवन को चित्रित करता है जिनके लिए परिवार धर्म एवम् समाज से ज्यादा श्रेष्ठ है। यकीनन यह अत्यंत वास्तविक एवम् मार्मिक कहानी है।

पुस्तक समीक्षा - कोरे कागज

  अमृता प्रीतम द्वारा लिखित “कोरे कागज” उपन्यास व्यक्ति के अंतर्गत की उथल-पुथल एवं स्वयं के होने की सच्चाई जानने की इच्छा पर आधारित है | उ...