गुरुवार, 23 अप्रैल 2020

ख्वाब

है हर अरमान अधूरा
मैंने तो किया अपनों का ख्वाब पूरा,
खुद को भुलाकर जी थी जिंदगी
फिर क्यूँ यूं हुई मैं इतनी अकेली ।

हर लम्हां हर पल काटता है
तेरी बेवफाई की याद दिलाता है ।

खुद को ना पा सकी मैं बस
सभी की होते-होते
खो दिया अपने सपनों को
तेरे पीछे दौड़ते-दौड़ते ।

ए खुदा अब तो रहमत बक्श
मिला दे मुझे खुद से,
हटा दे ये अहसासों का किस्सा
बना दे मुझे उनके जैसा।

हेमा#जिंदगी का सच#

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