गुरुवार, 10 सितंबर 2020

यूं ही...

आसां नहीं है महफ़िल
 में मुस्कुराना
तुझे देखकर भी
निगाहें हटाना,
शायरी पर शायरी
करते जाना
और तुझ से
वाह भी पा जाना।
आसां नहीं है
खुद से खुद को छुपाना।

जिक्र से ख्याल आया 
कि तुम तो वही हो 
जो बारिश में तन्हा
छोड़ गए थे मुझे।।

बड़ी मासूम सी है उसकी शिकायत 
कि मेरी किस्मत में तेरा
जिक्र क्यों नहीं....

रूह रुखसत ना हो
तब तक तेरे है हम
और
तू मेरा ना हो 
तब तक...
तेरे इंतज़ार में है हम...

चुरा लो खुशियों को वक्त से
ये वक्त कभी वापिस नहीं आता,
अरमान कितने भी दबे हो दिल में
ये यादों का समां ही साथ दे जाता है।

जो छूट गया वो अपना था ही नहीं,
खुद से ही आशिकी कर लो ए मेरे दोस्त।

हम तो राही है एक सफर के
हर मोड़ पर कुछ छूट ही जाता है।

गए थे अलविदा कहकर
हम कहां तक
इंतजार करते,
अब ना हम और
ना वो बहार।

खबरों की इस दुनिया में
ये ख्याल आया कि
तुम तो वही हो जो
आने का कह कर गए थे।

चर्चे होंगे दूर तक उनके कि 
एक शक्स था जो
बस खुद की खबर ना रख सका


ना कर इंतजार मंजिल का राही
ये रास्ते खत्म ही नहीं होते,
चल रहा हूं मुद्दत से मैं
बस एक मुलाकात के लिए।


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