कुछ अधूरी सी चाहतों के
मंजर बन गए
मेरी साँसों में बसी रूह
की दास्तां बन गए
थे जो जज़्बात कहीं बस ख्वाबों में
उस हर पल की तस्वीर बन गए |
है दरमिया फासले मगर
मोहब्बत का जहां बन गए,
मेरी नादानी और तेरी रुसवाई का
एक अनकहा लफ्ज़ बन गए।
मिटा भी नहीं और
निभा भी नहीं
ऐसा ताउम्र का सफर
बन गए हो।
मुझमें तुम बस गए हो
इस तरह
मेरे कुछ बनने की
वजह बन गए हो।
मैं रहूं या ना रहूं
मेरे नाम के संग
जुड़ गए हो तुम।
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