मंगलवार, 28 फ़रवरी 2023

 कुछ अधूरी सी चाहतों के

 मंजर बन गए 

मेरी साँसों में बसी रूह 

की दास्तां बन गए 

थे जो जज़्बात कहीं बस ख्वाबों में 

उस हर पल की तस्वीर बन गए |

है दरमिया फासले मगर

मोहब्बत का जहां बन गए,

मेरी नादानी और तेरी रुसवाई का

एक अनकहा लफ्ज़ बन गए।

मिटा भी नहीं और

निभा भी नहीं

ऐसा ताउम्र का सफर 

बन गए हो।

मुझमें तुम बस गए हो

इस तरह

मेरे कुछ बनने की

वजह बन गए हो।

मैं रहूं या ना रहूं

मेरे नाम के संग

जुड़ गए हो तुम।












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