रविवार, 25 दिसंबर 2022

रुखसत

ए जालिम मोहबत, 
तेरे शहर से रुखसत का
वक्त आ गया है।
तुझे पाने के लिए
सब कुछ खो बैठे
अब तेरे जुल्मों से राहत का
एक मोड़ आ गया है।
पाकर दर्द की नासूर यादें
पाकर सीतमों के अक्ष 
अब बिछड़ने का दौर 
आ गया है।
ए जालिम मोहबत
तेरे शहर से रुखसत का
वक्त आ गया है।


सोना

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