तेरे शहर से रुखसत का
वक्त आ गया है।
तुझे पाने के लिए
सब कुछ खो बैठे
अब तेरे जुल्मों से राहत का
एक मोड़ आ गया है।
पाकर दर्द की नासूर यादें
पाकर सीतमों के अक्ष
अब बिछड़ने का दौर
आ गया है।
ए जालिम मोहबत
तेरे शहर से रुखसत का
वक्त आ गया है।
सोना
अमृता प्रीतम द्वारा लिखित “कोरे कागज” उपन्यास व्यक्ति के अंतर्गत की उथल-पुथल एवं स्वयं के होने की सच्चाई जानने की इच्छा पर आधारित है | उ...
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