तेरे शहर से गुजर रहे है हम ....
तुझ तक आहट तो पहुंची होगी...
रफ्ता रफ्ता कटती जिंदगी में
धड़कन तो जरूर बढ़ी होगी।
ये बहती हवा मुझ तक तो
तेरा प्यारा सा अहसास लाई है...
इस मिट्टी में भी मुझे तेरे
कदमों की दिखी परछाई है ।
तू मेरे ख्यालों में इस कद्र
छाया सा हुआ है...
सोच में भी तू है और
लगे सामने तेरा साया है।
प्यार के इस फैले जाल को
अब मैं क्या नाम दूं
दिल में तू, दिमाग में तू
और मेरी नफरत में भी
बस तू ही तू है।
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