हैरत में हूँ कि तुझ तक
मेरे लफ्ज ही नहीं पहुंचे,
मेरे दिल का हाल जो मैंने
तेरे दरवाजे पर छोडा था।
वो केवल एक खत ना था
शब्दों में सिमटा मेरा रक्त ना था,
मेरे लफ्ज ही नहीं पहुंचे,
मेरे दिल का हाल जो मैंने
तेरे दरवाजे पर छोडा था।
वो केवल एक खत ना था
शब्दों में सिमटा मेरा रक्त ना था,
मेरे अहसासों की हर आहट थी उसमें
मेरे प्यार की हर आवाज थी उसमें।
आस थी मुझे कि तू आएगा,
या मेरे यकीं का तार,
तेरा जवाब देकर जाएगा
पर ना तू आया
ना तेरे आने की खबर...
पर है उम्मीद की आज नहीं तो कल
तूझे आना ही होगा....
मेरे प्यार को तूझे
दिल से अपनाना ही होगा...
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