दूर होकर भी न जाने क्यूँ
तेरे ओर करीब हुई हूँ मैं,
ना बात ना तकरार ना ही मुलाकात
फिर भी हर समय तू मेरे पास है।
है जीवन हर किसी का यूं ही
यही कहता मेरे आस-पास का समां है,
पर मैं कैसे दूर रहूंगी तुझसे
जब तू ही मेरी सुबह और तू ही मेरी शाम है।
आवाज हर पल तेरी मेरे साथ है
तू कैसे फिर मेरे प्यार से अनजान है,
मेरी हर सांस पुकारती है तुझे
फिर तू कैसे हुआ मुझसे इतना नाराज है।
मालूम नहीं मेरी किस्मत में अब क्या है?
तू ही है मेरी जिंदगी का सच और
तू ही एक हसीन ख्वाब भी है।
तेरे ओर करीब हुई हूँ मैं,
ना बात ना तकरार ना ही मुलाकात
फिर भी हर समय तू मेरे पास है।
है जीवन हर किसी का यूं ही
यही कहता मेरे आस-पास का समां है,
पर मैं कैसे दूर रहूंगी तुझसे
जब तू ही मेरी सुबह और तू ही मेरी शाम है।
आवाज हर पल तेरी मेरे साथ है
तू कैसे फिर मेरे प्यार से अनजान है,
मेरी हर सांस पुकारती है तुझे
फिर तू कैसे हुआ मुझसे इतना नाराज है।
मालूम नहीं मेरी किस्मत में अब क्या है?
तू ही है मेरी जिंदगी का सच और
तू ही एक हसीन ख्वाब भी है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें