मंगलवार, 21 जनवरी 2020

कुछ अरसे बाद

आज बहुत दिनों बाद कुछ कहने का मन हुआ
बीते हुए लम्हें फिर से जीने का मन हुआ।
देखकर तेरा मासूम सा चेहरा
फिर हंसने का मन हुआ,
मां के आंचल में फिर से
बहुत रोने का मन हुआ।
है तू मेरी हर सांस का सरगम
इसे फिर से गुनगुनाने का मन हुआ,
कर दिया तूने मुझे पूरा
ये तूझे बताने का मन हुआ।
आज बहुत दिनों बाद
बचपन फिर से जीने का मन हुआ।

कुछ तो रहमत थी उस खुदा की
जो तुझे मेरे पास भेजा,
जीवन की हर ख्वाईश को
तूझे देने का मन हुआ।
तेरे प्यारे से स्पर्श को
हर पल छूने का दिल हुआ,
तुझमें अपनी एक अलग
दुनिया बसाने का मन हुआ।

आज फिर एक अरसे बाद
कुछ कहने का मन हुआ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

पुस्तक समीक्षा - कोरे कागज

  अमृता प्रीतम द्वारा लिखित “कोरे कागज” उपन्यास व्यक्ति के अंतर्गत की उथल-पुथल एवं स्वयं के होने की सच्चाई जानने की इच्छा पर आधारित है | उ...