गुरुवार, 26 सितंबर 2024

यही सच है - मन्नू भंडारी (कहानी)

जीवन के उलझे रिश्तों को बहुत ही सुंदर रूप में *यही सच है* कहानी में पिरोया गया है। दीपा और निशीथ का किशोरावस्था का प्यार, जो परवान नहीं चढ़ पाता जिसका कारण दीपा को नहीं पता और वे अलग हो जाते है।

पहले प्यार को दिल में कहीं दबाए दीपा अपनी थिसिस के लिए कानपुर आती है जहां उसे संजय मिलता है। संजय एक जिंदादिल व्यक्ति जो दीपा की पसंद के रजनीगंदा के फूल लेकर प्रतिदिन उससे मिलने आता है। दीपा ने उसे निशीथ के बारे में भी सब बताया है। इसी बीच दीपा को कोलकाता से साक्षात्कार का पत्र मिलता है जिससे संजय काफी खुश होता है। दीपा को कोलकाता में नौकरी मिलने पर वह भी अपना स्थानांतरण वही करवा लेगा और वे दोनों अपना नया जीवन शुरू करेंगे। इन्हीं सपनों के साथ दीपा कोलकाता अपनी दोस्त इरा के घर पहुंचती है। कोलकाता में दीपा की मुलाकात निशीथ से होती है और वो अचानक ही उसकी ओर खींची चली जाती है। हालांकि दीपा सुनना चाहती थी कि निशीथ ने ऐसा क्यों किया? और वो उससे अब भी प्यार करता है। पर निशीथ का मौन टूटने का नाम ही नहीं लेता। निशीथ उसको नौकरी दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करता है पर उससे ज्यादा वो कुछ नहीं कहता। उसकी कानपुर वापसी पर ट्रेन में निशीथ के हाथ का स्पर्श उसके दबे प्यार को फिर हवा दे देता है और वो कानपुर पहुंचते ही उसको पत्र लिखती है।
पत्र के उत्तर के इंतजार में दीपा को केवल नौकरी प्राप्ति की बधाई का पत्र प्राप्त होता है, शेष फिर की समाप्ति के साथ। उसी समय संजय का आगमन उसके सारे सब्र का बांध तोड़ देता है और दीपा एक स्वप्न से बाहर आकर हकीकत को गले से लगा लेती है। उससे महसूस होता है कि यही सच है, बाकी सब मिथ्या था, भ्रम था।



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