गुरुवार, 14 नवंबर 2024

बचपन

ए बचपन, तू लौट आ वापिस,
ये समझदारी, अब समझ नहीं आती।

उम्र जितनी बढ़ती जाती है,
उतनी तेरी याद ज्यादा आती है।

खो ना जाए कहीं, उस मासूमियत के बिना
बीते पलों की नादान शरारतों के बिना।

उस बेफिक्री में भी बहुत खुश थे,
अब हर पल में फिक्र में फंसे है।

ए बचपन, बस लौट आ कहीं से
उन पलों को अपने साथ ले।

#hema#


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