सोमवार, 11 मई 2020

मुक्तक

वक्त को कहां मालूम
इन लम्हों की नजाकत,
हर घड़ी इन्हें संजोने के लिए
खुद को खोते ही रहे हम
तुझे पाने के लिए...

आरजू नहीं किसी अपने का दिल दुखाने की
मेरी तो चाहत बस अपनों के मुस्कुराने की,
खफा ना होना हमसे कभी अनजाने में भी
बेवफा बन हमें ना भूल जाना कभी।

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