है मिसाल भारत की जग में
पूजित यहां जमीं, आसमां और सूरज है,
वृक्ष, गाय और गंगा में भी
देवगणों का ही अंश है।
सजग और सजेत भारत की
फिर जनता क्यूं अनजान है,
जिनकी पवित्रता की कसम लेती
उसका दामन बदबू से बेहाल है।
साम, दाम से अब काम न होगा
दण्ड का रुख अपनाना होगा,
हमारी मां पर फैली गंदगी को
फौरन तट से हटाना होगा।
पावन जल का स्पर्श बहुत है, स्नान बंद कराना होगा
मरणावशेष को गंगा की जगह, कहीं ओर बहाना होगा,
आस-पास के नालों का, रुख कहीं ओर कराना होगा
मंदिर में प्रसाद सामग्री का, चढावा बंद कराना होगा,
नमामि गंगे वाक्य को मन से अपनाना होगा
जनता और प्रशासन को अब मिलकर कदम उठाना होगा।
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