वेदों और पुराणों में
इतिहास के हर दावों में,
हमने सहेजकर रखा है
पाया जो न्यासों में।
पवित्र, पूजित देवी स्वरुप में
गंगा की गाथा जानी है,
भागीरथी बन वो आई
इस धरा में लाई खुशहाली है।
थी विराजमान जो शिव के मस्तक पर
लाने का धरा पर हुआ भागीरथी प्रयास,
कल-कल करती आई धरा पर
किया धरती का पावन हर आधार।
है पावन जल इसका
करता सभी का उद्धार,
जन्म-मृत्यु सभी की है गंगा
हर पल तारणताल।
माता के रुप में पूजित है
पवित्रता की जननी है,
लोगों के तन-मन का पाप दूर करते-करते
खुद ही हो गई मैली है।
गंगा-स्नान के महत्त्व पर
अगर रखना है ध्यान और मान,
सख्ती से प्रशासन करें
गंदगी फैलाने वालों पर मार।
कचरा, नाला, गंदा पानी
का हो अलग निकास,
मृत्यु पूजन की साम्रगी का
हो एक अलग कुण्ड में प्रवाह।
देते है हम सभी गंगा मां को मन से मान
तो क्यूं प्रदूषित कर, करते है उसका अपमान,
नहीं अब कर पाएगा अकेला भागीरथ यह प्रयास
मिलकर कार्य करने पर ही, सफल होगा यह अभियान।
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