मैं गिरूं तो उठाने के लिए
बस एक हाथ चाहिए।
उसके हर ग़म को, बांट सकूं
बस ये विश्वास चाहिए।
अपने हर दुख को, उसे बता सकूं
बस वो अधिकार चाहिए ।
हूँ मैं भी, तेरे हर फैसले में
बस ऐसा एक दिलदार चाहिए।
दे सकूं, जिसके आंखों को सुकून
बस ऐसा एक हमराज चाहिए।
अमृता प्रीतम द्वारा लिखित “कोरे कागज” उपन्यास व्यक्ति के अंतर्गत की उथल-पुथल एवं स्वयं के होने की सच्चाई जानने की इच्छा पर आधारित है | उ...
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